श्यामल! अब घिर घिरके न आओ – घनश्याम ठक्कर

श्यामल! अब घिर घिरके न आओघनश्याम ठक्कर

——————–

मेरी आंखोसे बिजली गिरेगी रे, श्यामल! अब घिर घिरके न आओ

‘सूरजकी आंखोमें काजल’-सा घिरना,
बस इतना बरसो कि में जलजलुं ना…   More

 

~ by ઘનશ્યામ ઠક્કર on January 23, 2008.